UGC Act In Hindi 2026 : यूजीसी का नया नियम क्या है? जिस पर ‘सुप्रीम कोर्ट’ ने लगाई रोक, जानते हैं विवाद का पूरा मामला

UGC Act In Hindi 2026

UGC Act In Hindi 2026 : यूजीसी के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट के रोक के बाद देश की राजनीति और विश्वविद्यालय परिसरों में उठता विवाद फिलहाल थमता दिख रहा है लेकिन सवाल है कि क्या यह विराम अस्थाई है या आने वाले दिनों में यह मुद्दा नए सिरे से और ज्यादा तीखा होकर लौटेगा, 17 दिन पहले लागू हुए UGC के नए नियम को सिर्फ अदालत में अगली सुनवाई तक रोकते हुए केंद्र सरकार और UGC से जवाब मांगा है तब तक 2012 का पुराना नियम ही लागू रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी के बाद लगाई रोक

UGC Act In Hindi 2026 : मुख्य न्यायाधीश “सूर्यकांत” और न्यायमूर्ति “जॉयमाल्या बागची” की पीठ ने कहा कि नियम पहली नजर में अस्पष्ट है और उनके दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब भेदभाव की परिभाषा पहले से मौजूद है तो – जाति आधारित भेदभाव को अलग से परिभाषित करने की क्यों जरूरत पड़ी। CJI सूर्यकांत की टिप्पणी सबसे ज्यादा चर्चा में रही, जब उन्होंने कहा कि, “हमने जातीविहीन समाज की दिशा में जो प्रगति की है, क्या अब हम फिर से पीछे की ओर जा रहे हैं? “

यही वो टिप्पणियां है, जिनके बाद सवर्ण समाज के प्रदर्शनकरियों को लगा कि उनकी आशंकाओं को सर्वोच्च न्यायालय ने गंभीरता से सुना है। गौरतलब है कि इस मुद्दे पर प्रदर्शन सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं थे। कई जगह पर भाजपा कार्यालय तक विरोध पहुंचा। ‘बीजेपी मुर्दाबाद’ के नारे लगे और कई जगह पर नेताओं को वोट न देने के पोस्टर भी लगाए गए। स्थिति यह थी कि सांसद और मंत्री कैमरे के सामने खुलकर बोलने से बचते दिखे।

19 मार्च को होगी अगली सुनवाई

UGC Act In Hindi 2026 : ध्यान देने वाली बात यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से किसी तरह की तक आपत्ति सामने नहीं आई है यह राजनीति के गलियारों में चर्चा का विषय है कि क्या सरकार ने सामाजिक असंतोष को बढ़ते दबाव को देखते हुए फिलहाल टकराव से दूरी बनाए रखने को ही बेहतर समझा। अब 19 मार्च को अगली सुनवाई होनी है तब तक 2012 का नियम लागू रहेगी, यानी फिलहाल कॉलेज और विश्वविद्यालय में जाति आधारित भेदभाव को लेकर शिकायतों का नया ढांचा ठंडा बस्ता में चला गया है अब 19 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई तय करेगी कि UCG के नए नियमों का भविष्य क्या होगा।

क्या है UGC का नया ‘इक्विटी’ नियम

UGC Act In Hindi 2026 : दरअसल, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UCG) ने 15 जनवरी 2026 से पूरे देश में नया नियम लागू किए थे जिनका पूरा मकसद था कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी में बढ़ते भेदभाव (DISCRIMINATION) को खत्म करना। UCG चाहता था कि किसी भी छात्र के साथ उसकी जाति,जेंडर या बैकग्राउंड की वजह से बुरा बर्ताव न हो यह नए नियम 2012 के पुराने नियमों की जगह लेने वाले थे UGC का कहना था कि पुराने कायदे अब आउटडेटेड हो गए थे इसलिए उन्हें और ज्यादा सख्त और साफ बनाया गया है ताकि हर छात्र को बराबर का सम्मान मिल सके।

UCG के 2012 पुराने नियमों में क्या था? जिसे कोर्ट ने फिर से लागू किया

दरअसल यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन ने 17 सितंबर 2012 को भारत के सभी हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूट में समानता को बढ़ावा देने और भेदभाव को रोकने के लिए नियम बनाए थे तब यूजीसी ने कहा था कि हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज कैंपस में “इक्वल ऑपच्यरुनिटी सेल” (EOC) बनाएं जिसका काम एससी और एसटी स्टूडेंट की शिकायत सुनना और केंपस में समानता का माहौल बनाना हालांकि यह सिर्फ एडवाइजरी थी। इसे अनिवार्य नहीं किया गया था।

सिर्फ एससी और एसटी तक सीमित थे ये नियम

UGC Act In Hindi 2026 : 2012 के नियम, खासतौर पर अनुसूचित-जाति और अनुसूचित-जनजाति स्टूडेंट के लिए बनाए गए थे इसमें ओबीसी को नहीं जोड़ा गया था यूजीसी एक 2026 में ओबीसी को भी जोड़ा गया है। एससी एसटी छात्रों के खिलाफ जाति भेदभाव के अलावा नियम अन्य आधारों जैसे धर्म, भाषा, जातीय, लिंग और दिव्यंगता पर भी लागू होते हैं लेकिन सिर्फ सलाह के तौर पर अनिवार्य नहीं है।

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